"बच्चा अपने आप बोलने लगेगा" — यह सलाह सालों बर्बाद कर देती है। 2 साल में 50 शब्द न बोले तो इंतज़ार न करें। दिमाग 1 से 4 साल के बीच भाषा सबसे तेज़ी से सीखता है — इस उम्र में थेरेपी का परिणाम कई गुना बेहतर मिलता है। हर मूल्यांकन से पहले हम सुनने की जांच करते हैं — क्योंकि अक्सर देर से बोलने का छिपा कारण सुनने की कमी होती है।
हम क्या इलाज करते हैं
- देर से बोलना / कम शब्द
- अस्पष्ट उच्चारण (तुतलाना)
- हकलाना (स्टैमरिंग) — बच्चे और बड़े
- ऑटिज्म/डेवलपमेंट डिले के लिए कम्युनिकेशन थेरेपी
- कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद AVT
- ऑनलाइन वीडियो सेशन — दुनिया में कहीं से भी
ये लक्षण हों तो जांच कराएं
- 2 साल का होकर भी बच्चा 50 से कम शब्द बोलता है
- 3 साल में दो शब्द जोड़कर वाक्य नहीं बनाता ("पानी दो", "मम्मी आओ")
- घरवालों के अलावा कोई बच्चे की बात समझ नहीं पाता
- बोलते समय अटकना, शब्द या आवाज़ दोहराना (हकलाना)
- नाम पुकारने पर ध्यान नहीं देता, आंख नहीं मिलाता
- स्कूल से उच्चारण या भाषा को लेकर शिकायत आई है
विज़िट में क्या होता है?
- माता-पिता से विस्तृत बातचीत — बच्चे का विकास, घर की भाषा, चिंताएं
- सुनने की जांच — क्योंकि देर से बोलने का छिपा कारण अक्सर सुनने की कमी होती है
- खेल-खेल में स्पीच-लैंग्वेज मूल्यांकन — बच्चे को जांच जैसा लगता ही नहीं
- उसी दिन रिपोर्ट और थेरेपी योजना — घर पर क्या प्रैक्टिस करनी है, यह भी सिखाते हैं
खर्च कितना आता है?
गांधीनगर में स्पीच थेरेपी सेशन आम तौर पर ₹500–1,000 की रेंज में होता है; पहली बार के विस्तृत मूल्यांकन का चार्ज थोड़ा अलग होता है और ऑनलाइन सेशन का दाम क्लिनिक जितना ही। साथ में सुनने की जांच (PTA ₹300–800) की सलाह देते हैं। सटीक चार्ज के लिए 88776 72821 पर कॉल/व्हाट्सएप करें — कोई छिपा खर्च नहीं।
